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जन विश्वास विधेयक को राज्यसभा से मिली मंजूरी, 784 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव, पीएम मोदी ने सराहा

 Published : Apr 02, 2026 09:47 pm IST,  Updated : Apr 02, 2026 10:35 pm IST

जन विश्वास विधेयक छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर कारोबार को आसान बनाने और आम नागरिकों को राहत देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। यह कानून भय की जगह विश्वास और सुधार पर आधारित नई संस्कृति की नींव रखता है।

गुरुवार को संसद में बोलते केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल।- India TV Hindi
गुरुवार को संसद में बोलते केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल। Image Source : SANSAD TV

देश में कारोबार और आम जीवन को आसान बनाने के लिए लाया गया जन विश्वास (उपबंधों का संशोधन) विधेयक 2026 को गुरुवार को राज्यसभा ने ध्वनिमत से पास कर दिया। लोकसभा ने इसे एक दिन पहले ही मंजूरी दे दी थी।इस विधेयक के माध्यम से सरकार ने 79 केंद्रीय कानूनों में कुल 784 प्रावधानों में संशोधन का प्रस्ताव किया है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना, दंड व्यवस्था को तर्कसंगत बनाना और भय की जगह विश्वास की संस्कृति को बढ़ावा देना है।

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल का बयान

विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने कहा, “इस कानून का उद्देश्य ‘कल्चर ऑफ ट्रस्ट’ यानी विश्वास की संस्कृति बनाना है, जो भय पर नहीं, बल्कि कर्तव्य और विश्वास पर आधारित होगी।” उन्होंने कहा कि यह कानून लोगों को सुधरने का मौका देता है। छोटी गलतियों पर पहले चेतावनी, दूसरी बार दंड और गंभीर गलती पर ही कड़ी कार्रवाई का प्रावधान है। इसे चरणबद्ध कार्रवाई कहा गया है। उन्होंने कहा कि कुछ साल पहले देश में करीब 500 स्टार्टअप थे और आज इनकी संख्या तीन लाख से अधिक हो चुकी है। इन स्टार्टअप के संचालक युवाओं से छोटी-मोटी गलतियां हो सकती हैं लेकिन हमें उन्हें इनके लिए सजा देने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए। 

पीएम मोदी ने दी अपनी प्रतिक्रिया

पीएम मोदी ने इस मौके पर कहा - ‘जीवन की सुगमता’ और ‘व्यापार करने की सुगमता’ को एक बड़ा बढ़ावा…यह अत्यंत हर्ष का विषय है कि संसद ने ‘जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक, 2026’ पारित कर दिया है। यह विधेयक एक ऐसे विश्वास-आधारित ढांचे को सुदृढ़ करता है, जो हमारे नागरिकों को सशक्त बनाता है। यह उन नियमों और विनियमों की समाप्ति का प्रतीक है, जो अब अप्रचलित हो चुके हैं। साथ ही, यह मामलों के त्वरित निपटारे को सुनिश्चित करता है और अपराध-मुक्तिकरण के माध्यम से मुकदमों के बोझ को कम करता है। एक और उल्लेखनीय बात यह है कि इस विधेयक का मसौदा तैयार करने में जिस परामर्श-आधारित दृष्टिकोण को अपनाया गया है, उन सभी लोगों को मेरी बधाई, जिन्होंने इस विधेयक का मसौदा तैयार करने में अपने सुझाव दिए और संसद में इसका समर्थन किया।

प्रमुख प्रावधान

  • 57 प्रावधानों से कारावास की सजा हटाई गई
  • 158 प्रावधानों से जुर्माना हटाया गया
  • 17 प्रावधानों में कारावास की अवधि कम की गई
  • 113 प्रावधानों में कारावास को जुर्माने में बदला गया

विधेयक में मोटर वाहन अधिनियम, नई दिल्ली नगरपालिका अधिनियम, दवाओं से संबंधित कानून, बैंकिंग, बीमा, पेटेंट, विद्युत, रेलवे समेत कई महत्वपूर्ण कानूनों में बदलाव किए गए हैं।

महत्वपूर्ण बातें समझ लें

नकली दवाओं के निर्माण, भंडारण, बिक्री और आयात पर कोई छूट नहीं दी गई है। सजा पहले की तरह ही बनी रहेगी। स्टार्टअप्स और छोटे उद्यमियों को राहत मिलेगी। गोयल ने कहा कि पहले 500 स्टार्टअप थे, अब संख्या 3 लाख से अधिक हो चुकी है। युवा उद्यमियों की छोटी गलतियों को सजा देने के बजाय उन्हें आगे बढ़ने का मौका देना चाहिए।

लगभग 1,000 छोटी-मोटी गलतियों पर अब लोगों को अदालत नहीं जाना पड़ेगा। सरकार का मानना है कि यह विधेयक “विकसित भारत” के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा और लोगों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रति विश्वास को और मजबूत करेगा।

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